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जन्माष्टमी- जानिए की अटूट प्रेम होने पर भी कृष्ण क्यों नहीं हो पाए राधा के

जन्माष्टमी- जानिए की अटूट प्रेम होने पर भी कृष्ण क्यों नहीं हो पाए राधा के
Written by admin

आज भी लोग राधा और कृष्ण के प्रेम को मिसाल मानते हैं। जहां आज जब भी कहीं दो प्रेमियों को निस्वार्थ प्रेम करते देखा जाता है तो लोग उसे कह देते हैं कि यह दोनों बिल्कुल राधा कृष्ण के जैसे ही है। आपको बता दें कि राधा और कृष्ण का प्रेम और अलौकिक है। यह कोई प्रेमी प्रेमिका वाला प्यार नहीं बल्कि भगवान और भक्त वाला प्यार है।

जन्माष्टमी- जानिए की अटूट प्रेम होने पर भी कृष्ण क्यों नहीं हो पाए राधा के

आज भी लोग राधा और कृष्ण के प्रेम को मिसाल मानते हैं। जहां आज जब भी कहीं दो प्रेमियों को निस्वार्थ प्रेम करते देखा जाता है तो लोग उसे कह देते हैं कि यह दोनों बिल्कुल राधा कृष्ण के जैसे ही है। आपको बता दें कि राधा और कृष्ण का प्रेम और अलौकिक है। यह कोई प्रेमी प्रेमिका वाला प्यार नहीं बल्कि भगवान और भक्त वाला प्यार है। इसलिए शायद यही वजह थी कि दोनों के बीच शादी का सवाल उठने की बात ही नहीं आई। वही शायद आप नहीं जानते होंगे कि श्रीकृष्ण मनुष्य को यह संदेश देना चाहते थे कि प्रेम एक निस्वार्थ भावना है, जबकि विवाह एक समझौता या अनुबंध है। इसलिए यह जरूरी नहीं कि आपको अपनी प्रेमिका से विवाह करना पड़े।

कृष्ण बचपन से नंद और यशोदा के साथ रह रहे थे। अचानक उन्हें यह बताया गया कि वह उनके पुत्र नहीं है, तो यह सुनते ही वह उठ खड़े हुए और अपने अंदर एक बहुत बड़े रूपांतरण से होकर गुजरे। अचानक कृष्ण को महसूस हुआ कि हमेशा से कुछ ऐसा था जो उन्हें अंदर ही अंदर झांक झोड़ता था, लेकिन वह इन उत्तेजित भावनाओं को दिमाग से निकाल देते थे और जीवन के साथ आगे बढ़ जाते थे। वहीं अब बताया जाता है कि कृष्ण अपने आसपास के लोगों और समाज के लिए पूरी तरह से समर्पित थे और लोगों के साथ उनका गहरा लगाव था।

राधा और कृष्ण की महत्वपूर्ण पांच मुलाकाते

राधा और कृष्ण की महत्वपूर्ण पांच मुलाकाते
  1. राधा जब कृष्ण के जन्मोत्सव पर अपनी माता के साथ नंदगांव आई थी, तब वहां श्री कृष्ण पालने में झूल रहे थे और राधा माता की गोद में था।
  2. कृष्ण और राधा की दूसरी मुलाकात अलौकिक ना होकर लौकिक थी। इसी दूसरे मिलन में राधा ने कृष्ण के साथ भांडीर वन में विवाह कर लिया।
  3. दोनों की तीसरी मुलाकात को प्रेम की शुरुआती संकेत नामक स्थान से जाना जाता है। जहां कृष्ण और राधा की तीसरी मुलाकात नंद गांव से 4 मील दूरी पर बसा हुआ गांव में हुई।
  4. यह चौथी मुलाकात तब की है जब राधा 14 साल की थी और भगवान श्री कृष्ण उन्हें छोड़कर हमेशा के लिए मथुरा रह रहे थे।
  5. पांचवी मुलाकात में राधा का अंत समय था। जहां राधा कृष्ण की मुलाकात द्वारिकापुरी में हुई। राधा के जीवन में उस वक्त कुछ ही क्षण बचे थे।

यह बात हर कोई जानता है कि कृष्ण और राधा का संबंध आमतौर पर पति पत्नी का नहीं बल्कि प्रेमी प्रेमिका के रूप में जाना जाता है। इसके बाद भी भगवान कृष्ण के साथ कहीं भी उनकी पत्नियों की तस्वीर या मूर्ति नहीं मिलती है। हर जगह कृष्ण के साथ राधा ही नजर आती है। इसकी वजह यह है कि 16108 पत्नियों पर राधा का प्रेम भारी पड़ा था। यह बात भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं रुक्मणी को बताई थी।

क्यों मनाया जाता है जन्माष्टमी

क्यों मनाया जाता है जन्माष्टमी

इस दिन भगवान कृष्ण को याद किया जाता है। जहां आपको बता दें कि हिंदू धर्म के पौराणिक ग्रंथों के अनुसार भगवान विष्णु ने पृथ्वी में बढ़ते पाप और पापियों से अपने सभी भक्तों की रक्षा करने हेतु कृष्ण रूप में अवतार लिया। भगवान श्री कृष्ण का जन्म इसी दिन अष्टमी को मध्यरात्रि 12:00 बजे देवकी और वासुदेव के पुत्र रूप में हुआ था। भले ही श्री कृष्ण को जन्म माता देवकी ने दिया था, लेकिन उनका पालन-पोषण माता यशोदा ने किया था।आपको बता दें कि श्री कृष्ण के मामा कंस को यह श्राप मिला था कि उनका वध माता देवकी की कोख से जन्मी सातवीं संतान करेगी। जहां कंस ने अपनी मौत से डर कर देवकी और वासुदेव के 6 संतानों को मार दिया था, लेकिन वह सातवीं संतान को नहीं मार पाया। यह सातवीं संतान के रूप में भगवान कृष्ण जन्मे थे और इन्हीं ने बाद में कंस का वध कर इस दुनिया को उसके पापों से मुक्त किया था।
इसलिए भगवान श्री कृष्ण के जन्मदिन को हिंदू धर्म के अनुयाई जन्माष्टमी के पर्व के रूप में मनाते हैं। माना जाता है कि जब जब धरती पर पाप और अत्याचार और हिंसा बढ़ता है और धर्म का पतन हुआ है तब-तब भगवान ने पृथ्वी पर अवतार लिया है और सत्य और धर्म की स्थापना की है। जब कंस जैसे अत्याचारी, पापी और अधर्मी लोग का पाप बढ़ गया और धर्म का पतन होने लगा तब भाद्रपद माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी की मध्यरात्रि को अत्याचारी कंस का विनाश करने के लिए मथुरा में भगवान श्री कृष्ण ने अवतार लिया था।

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