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जेनेरिक और ब्रांडेड दवाइयों में ऐसी क्या अंतर है ? क्यों होती है जेनेरिक दवाइयां सस्ती ?

जेनेरिक और ब्रांडेड दवाइयों में ऐसी क्या अंतर है ? क्यों होती है जेनेरिक दवाइयां सस्ती ?
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जेनेरिक दवाओं की मनमानी कीमत निर्धारित नहीं की जा सकती है। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन के मुताबिक डॉ अगर मरीजों को जेनेरिक दवाई प्रिसक्राइब करें तो विकसित देशों में स्वास्थ्य खर्च 70% और विकासशील देशों में और भी अधिक कम हो सकता है।

जेनेरिक दवाएं

  • जेनेरिक दवाएं बिना किसी पेटेंट के बनाए और सरकुलेट की जाती है।
    एक जरूरी बात बता दें कि जेनेरिक दवाई के फार्मूले पर पेटेंट हो सकता है, लेकिन उसके मटेरियल पर पेटेंट नहीं किया जा सकता है।
  • वही माना जाता है कि इंटरनेशनल स्टैंडर्ड से बनी जेनेरिक दवाइयों की क्वालिटी ब्रांडेड दवाओं से कम नहीं होती है, ना ही इनका असर कुछ कम होता है।
    जेनेरिक दवाओं के डोस, उनके साइड इफेक्ट सभी कुछ ब्रांडेड दवाओं जैसे ही होते हैं।
  • जेनेरिक दवाइयों के प्रचार के लिए कंपनियां पब्लिसिटी नहीं करती है।
    जेनेरिक दवाएं बाजार में आने से पहले हर तरह के डिफिकल्ट क्वालिटी स्टैंडर्ड्स से गुजरती है।
  • जेनेरिक दवाओं की मनमानी कीमत निर्धारित नहीं की जा सकती है। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन के मुताबिक डॉ अगर मरीजों को जेनेरिक दवाई प्रिसक्राइब करें तो विकसित देशों में स्वास्थ्य खर्च 70% और विकासशील देशों में और भी अधिक कम हो सकता है।

जेनेरिक दवाओं के लाभ

  1. जेनेरिक दवाई सीधे खरीददार तक पहुंचती है।
  2. इन दवाओं की पब्लिसिटी के लिए कुछ खर्चा नहीं किया जाता, इसलिए यह सस्ती होती है।
  3. सरकार उन दवाओं की कीमत खुद तय करती है।
  4. जेनेरिक दवाओं का डोज और इफेक्ट ब्रांडेड दवाओं की तरह ही होते हैं।

जेनेरिक दवाइया से अलग ब्रांडेड दवाएं

  • ब्रांडेड दवाई प्रमुख कंपनियों द्वारा बनाई और बेची जाती है।
  • गिनी चुनी कंपनियों को छोड़कर अधिकतर कंपनी सिर्फ वितरण यानी मार्केटिंग करती है, बाकी दवा का उत्पादन कोई और करता है।
  • डॉक्टर जो ब्रांडेड दवाइयां लिखते हैं वह सब वास्तव में जेनेरिक दवाइयां ही होती है, लेकिन वे उस ब्रांड नाम की होती है, जो महंगी होती है।
  • जब किसी दवा कंपनी का निर्माण और वितरण के लिए एकमात्र अधिकार दिया जाता है तो दवा को उस पर पेटेंट कहा जाता है।
  • ब्रांडेड दवा डॉक्टर द्वारा प्रिसक्राइब की जाती है।

आखिर डॉक्टर हमें जेनेरिक दवाओं की जगह ब्रांडेड दवाइयां ही क्यों लिखते हैं
डॉक्टरों का कहना है कि जेनेरिक दवाइयों में कुछ खामियां होती है, जिसकी वजह से वह मरीजों को नहीं देना चाहते हैं।
और वहीं डॉक्टरों के द्वारा कुछ कारण है जिनकी वजह से वह हमें जेनेरिक दवाइयों का सेवन करने से मना करते हैं और नहीं लिखते हैं।

यह कुछ महत्वपूर्ण कारण है जिसके वजह से डॉक्टर हमें जेनेरिक दवाइयों का सेवन करने से मना करते है।

  1. जेनेरिक दवाओं को बनाने के समय उनकी गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा जाता है।
  2. जेनेरिक दवाओं का कोई क्लिनिकली ट्रायल नहीं होता और मरीजों पर उनके असर को कोई अध्ययन नहीं किया जाता।
  3. ऐसा शोध भी नहीं उपलब्ध है कि जेनेरिक दवाइयां बिल्कुल ब्रांडेड दवाओं जैसा ही काम करती है।

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