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समान काम के लिए समान वेतन (Equal Pay for equal work) का आदेश जारी, केंद्र ने लाखों अनियमित कर्मचारियों दिया लाभ

Equal Pay For Equal Work
Written by admin

खास बातें

कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग ने जारी किया आदेश
हालांकि नियमित रोजगार पाने का नहीं होगा हक
भुगतान उतने दिनों का होगा जितने दिन वो काम करेंगे

केंद्र की मोदी सरकार ने विभिन्न विभागों में काम कर रहे अपने अंतर्गत आने वाले दस लाख अनियमित (कैजुअल) कर्मचारियों के लिए त्योहार से पहले ही दीवाली मनाने का मौका दे दिया है। इन सभी अनियमित कर्मचारियों को अब नियमित कर्मचारियों के बराबर वेतन मिलेगा। प्रधानमंत्री कार्यालय के अधीन कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग ने इस संदर्भ में आदेश भी जारी कर दिया है। सरकारी आदेश के अनुसार, सभी अनियमित कर्मचारियों को अब आठ घंटे काम करने पर विभाग में उसी पद पर काम करने वाले नियमित कर्मचारियों के वेतनमान के न्यूनतम मूल वेतन और महंगाई भत्ते के बराबर ही भुगतान किया जायेगा। अनियमित कर्मचारी को उतने दिनों का ही भुगतान होगा, जितने दिन वे काम करेंगे। लेकिन आपको ये भी बताते चले की आदेश संख्या 49014/1/2017 के अनुसार उन्हें नियमित रोजगार पाने का हक नहीं होगा। फिलहाल इन अनियमित कर्मचारियों को संबंधित राज्य सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम वेतन (Minimum Pay) मिल रहा है।

अकुशल श्रमिकों के लिए 14,000 रुपये महीने का वेतन तय

Equal Pay for Equal work 14000 Minimum pay

मोदी सरकार ने सभी अकुशल श्रमिकों के लिए 14,000 रुपये महीने का वेतन तय किया है, लेकिन इस आदेश के बाद उन्हें ग्रुप डी के वेतनमान में न्यूनतम वेतन यानी 30,000 रुपये महीने की दर से भुगतान होगा। यानी एक ही बार में उनकी आमदनी दोगुनी से अधिक हो जाएगी। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी अनियमित कर्मचारी का काम नियमित कर्मचारी के काम से अलग है तो उसे राज्य सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम वेतन के आधार पर ही भुगतान किया जाएगा। समान कार्य के लिए समान वेतन के आधार पर दिए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद डीओपीटी का यह आदेश आया है। जिसकी प्रति सभी मंत्रालयों और विभागों को भेजा जा चूका है।

ट्रेड यूनियन को यह आदेश लागु होने पर अब भी है शंका

ट्रेड यूनियन के नेता सरकार के स्पष्ट आदेश के बावजूद इसके लागू हो पाने को लेकर चिंता कर रहे हैं। भारतीय मजदूर संघ जो देश की सबसे बड़ी ट्रेड यूनियन है उसके पूर्व अध्यक्ष बैजनाथ राय का कहना है कि ऐसे के कई आदेश पहले भी जारी हुए लेकिन लागू नहीं किए गए। ग्रुप सी और डी की अधिकतर नौकरियां अब सरकार ने निजी ठेकेदारों को आउटसोर्स कर दी हैं, इसलिए आदेश को लागू करा पाना सबसे बड़ी चुनौती है। सीटू नेता तपन रॉय का कहना है कि डीओपीटी द्वारा जारी किया गया यह आदेश केवल केंद्रीय कर्मचारियों के लिए है। सभी कर्मचारियों के लिए तभी होता जब श्रम मंत्रालय ने यह आदेश जारी किया होता। इसके लागू होने पर उन्होंने भी संदेह प्रकट किया।

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