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PM Modi से पंगा लेने वाले का सियासी करियर खत्म

नरेंद्र मोदी पूरे विश्व में एक ऐसे नेता के तौर पर उभरे हैं जिनके सामने किसी का टिक पाना थोड़ा सा मुश्किल माना जाता है। जैसे दुनिया को जीतने वाले सिकंदर के सामने आते ही दुश्मन घुटने के बल आ जाते हैं। वैसी ही सियासत के सिकंदर नरेंद्र मोदी के सामने आते हैं उनके दुश्मन पनाह मांगने लगते हैं।

PM Modi से पंगा लेने वाले का सियासी करियर खत्म

नरेंद्र मोदी पूरे विश्व में एक ऐसे नेता के तौर पर उभरे हैं जिनके सामने किसी का टिक पाना थोड़ा सा मुश्किल माना जाता है। जैसे दुनिया को जीतने वाले सिकंदर के सामने आते ही दुश्मन घुटने के बल आ जाते हैं। वैसी ही सियासत के सिकंदर नरेंद्र मोदी के सामने आते हैं उनके दुश्मन पनाह मांगने लगते हैं।

यह कुछ सालो का नतीजा है जहां मोदी ने पूरे देश में अपना परचम लहरा कर अपनी बातों को हमेशा विश्वसनीयता के साथ रखा है। वहीं कुछ लोग भी परेशान है कि आखिर भगवान ने नरेंद्र मोदी को किस मिट्टी से बनाया है, जिन्हें हटाने वाला लगता है पैदा ही नहीं हुआ….. अब इसे विधि का विधान कहे या उनकी परिश्रम का परिणाम कि नरेंद्र मोदी आज तक कोई भी चुनाव नहीं हारे हैं। इतना ही नहीं उनको हराने के लिए जो भी मैदान में उतरा समझो उसकी राजनीति सितारे की शाम हो गई। इनमें एक से बढ़कर एक नाम है और एक से बढ़कर एक धुरंधर है और कुछ तो बीजेपी के हैं और कुछ तो बीजेपी के बाहर वाले……… तो आपको हम कुछ ऐसे नामों की सूची बताएंगे जिन्होंने मोदी से पंगा लिया और अपने राजनीतिक करियर को विराम लगा दी:-

1. शत्रुघ्न सिन्हा

शत्रुघ्न सिन्हा

शत्रुघ्न सिन्हा का कभी बीजेपी में रहकर शब्दों के बड़े-बड़े बोल बोलने वाले शत्रुघ्न सिन्हा को मोदी से पंगा लेना इतना महंगा पड़ा की जनता ने ही उन्हें खामोश कर दिया। खुद तो हारे ही इसके अलावा उनकी बीवी पूनम सिन्हा भी लखनऊ सीट से हारी। बीजेपी से टिकट नहीं मिला तो कांग्रेस का दामन थाम कर राहुल गांधी की परिक्रमा में लगे रहे और जब कांग्रेस ने अपनाया तो जनता ने उन्हें ठुकरा कर घर बिठा दिया।

2. लालकृष्ण आडवाणी

लालकृष्ण आडवाणी

राजनीति में पीएम मोदी और लालकृष्ण आडवाणी का रिश्ता भले ही गुरु और शिष्य वाला रहा हो।
मगर 2013 में पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में नरेंद्र मोदी के पीएम उम्मीदवार करने वालो की विरोधी की आवाज उठी तो उसमें आडवाणी भी मुख्य थे। मोदी जिस आडवाणी के लिए जीत के मोहरे सजाया करते थे वहीं आडवाणी बगावत करने उतरे तो बीजेपी में किनारे लग गए फिर ना राज्यपाल का पद मिला और न ही राष्ट्रपति का पद मिला।

3. केशुभाई पटेल

केशुभाई पटेल

गुजरात की राजनीति से यह नाम लगभग गायब ही हो गया है, क्योंकि गुजरात के इस नेता ने नरेंद्र मोदी को सत्ता और सियासत से बाहर करने की कसम खाई थी। 2001 में केशुभाई पटेल को ही हटाकर नरेंद्र मोदी गुजरात के सीएम बने थे। केशुभाई तब से नरेंद्र मोदी के खिलाफ संगठन में बगावत करने की कोशिश करती रहे और आखिरकार उनका ही राजनीतिक कैरियर डूब गया।

4. संजय जोशी

संजय जोशी

मोदी के दोस्त कहलाने वाले संजय जोशी को गुजरात संगठन का प्रभारी बनाया गया। बाद में आरएसएस के प्रचारक भी बने……. माना जाता है कि केशुभाई पटेल का साथ देना संजय जोशी को खूब भारी पड़ा था। मोदी से बगावत के चक्कर में अपने करियर के आखिरी पड़ाव पर भी संजय जोशी पहुंच चुके थे।

5. शंकर सिंह वाघेला

शंकर सिंह वाघेला

कभी गुजरात की राजनीति के उभरते हुए सितारे कहलाने वाले वाघेला ने जब संगठन में नरेंद्र मोदी को उभरता हुआ देखा तो बगावत की तरफ चल पड़े। इसका नतीजा यह हुआ कि बीजेपी से बाहर हो गए फिर कांग्रेस में रहकर मोदी को घेरने में लगे रहे। एक दौर था जब कहा जाता था कि वाघेला ही नरेंद्र मोदी को कमर के नीचे मार सकते हैं लेकिन आज दौर बदल चुका है।

6. प्रवीण तोगड़िया

मोदी से दुश्मनी करने के चक्कर में अपने सियासी सफर को आज़ान में पहुंचाने वालों में नाम डॉक्टर प्रवीण तोगड़िया का भी है। एक दौर था जब तोगाड़ियां मोदी के लिए प्रचार करते थे, लेकिन जब मोदी ने तोगाड़ियां का इरादा जान लिया तो उनसे दूरी बना ली। प्रवीण तोगड़िया इस बात से चिढ़ गए, क्योंकि वह चाहते थे कि मोदी उनकी जी हुजूरी करें,लेकिन बात बिगड़ी और प्रवीण तोगड़िया बागी हो गए। नतीजा यह हुआ कि विश्व हिंदू परिषद की अध्यक्ष की कुर्सी गवाई। 2018 में उन्होंने अपनी एक राजनीतिक पार्टी भी बनाई, लेकिन 2019 में मोदी की आंधी में उनकी पार्टी धूल की तरह उड़ गई।

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