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Section 375 Movie Review: Akshaye Khanna, Richa Chadha’s performing Courtroom Drama

Section 375 Movie Review:
Written by admin

रोमांस, ड्रामा के बीच इस बार सिनेमाघरों में एक ऐसी फिल्म आई है, जिसने ऐसे मुद्दों पर चर्चा की है जो समाज की गहराई से जुड़ा हुआ है।

Section 375 Movie Review: Akshaye Khanna, Richa Chadha’s performing Courtroom Drama

Section 375 Movie Review: Akshaye Khanna, Richa Chadha’s performing Courtroom Drama

पिछले दिनों कई ऐसी फिल्में बड़े पर्दे पर नजर आई है, जो समाज और भारतीय कानून के महत्व को दर्शाती है। उन्हीं फिल्मों में से एक है सेक्शन 375……. इस फिल्म की कहानी एक मूवी डायरेक्टर की है। जिस पर उसके फिल्म में काम करने वाले एक कॉस्टयूम डिजाइनर रेप का आरोप लगाती है। जिसके परिणाम स्वरूप डायरेक्टर को निचली अदालत से सजा मिलती है और उसे जेल भेज दिया जाता है। इसके बाद इस केस की सुनवाई हाईकोर्ट में शुरू होती है। जहां यह मामला मीडिया और पब्लिक के सामने खुलकर सामने आता है। आपको बता दें कि यह केस दो टैलेंटेड वकील को सौंपा जाता है, जिसमें पब्लिक प्रॉसीक्यूशन का रोल रिचा चड्ढा और डिफेंस लॉयर का किरदार अक्षय खन्ना निभा रहे हैं।

वहीं जिन लोगों को अगर कानूनी मामलों पर दलीलों से भरपूर कोर्टरूम ड्रामा फिल्में पसंद है तो इस फिल्म को जरूर देखने जाए। फिल्म सेक्शन 375 में एक ही कहानी के दो अलग-अलग पहलुओं को दिखाने का प्रयास किया गया है। इसी के साथ आपको इस फिल्म में यह भी देखने को मिलेगा कि सामान्य तरीके से कोई भी कार्यवाही कितनी परेशान करने वाली और बोझिल होती है। फिल्म को भ्रष्टाचार और कानूनी जांच में पूरी तरह से रियल टच दिया है। वहीं फिल्म का कोर्टरूम ड्रामा दर्शकों को पूरी तरह से बांधने में कामयाब रहा है। वहीं दूसरी ओर डायरेक्टर अजय बहाल ने रेप जैसे सेनसिटीव मामले को बेहद सधे हुए तरीके से उठाया है।

पूरी फिल्म में अक्षय खन्ना छाए हुए हैं। वह इस फिल्म में एक बेहतरीन तरीके से अपना किरदार निभाते नजर आए हैं। वहीं दूसरी और ऋचा चड्ढा ने अपने किरदार के साथ पूरा न्याय किया है और सबसे महत्वपूर्ण बात तो यह है कि वह भी अक्षय के सामने कहीं भी कमजोर नहीं नजर आई है। इस फिल्म की सबसे खासियत यह है कि फिल्म किसी भी बिंदु पर खींची हुई महसूस नहीं करती है और उन संदेशों को भेजती है जो इसे करने का इरादा रखती है। इसके अलावा फिल्म दर्शकों को जागरूक करने में भी सक्षम रही है। अन्यथा माना जाता है कि कोई बलात्कार महिला की सहमति के बिना नहीं होता है। वही यह फिर मृतिका से निश्चित इच्छा और सहमति के बीच अंतर करने की आवश्यकता पर जोर देती है।

फिल्म में कलाकारों के बीच अक्षय खन्ना हर फिल्म में अपने किड़कीडे प्रदर्शन के साथ प्रभावित करते हैं। वही जज के रूप में किशोर कदम और कृतिका देसाई, संध्या मृदुल काफी रूप से सबको प्रभावित करते नजर आए हैं, जो फिल्म की कहानी को मूल रूप से जोड़ती है। आपको बता दें कि फिल्म आपको इस बारे में गहरी जानकारी देता है कि सत्ता की स्थिति रखने वालों के दिमाग में आखिर क्या चलता है, जो किसी महिला के मन और शरीर का उसकी सहमति के बिना उसके बिना उल्लेखन करना सामान्य समझते हैं।

धारा 375 हमारी न्यायिक प्रणाली के भ्रष्ट पक्ष को भी दर्शाता है।

आपको हमारी प्रणाली के कठोर वास्तविकता के करीब भी लाती है, जिसमें बलात्कार पीड़िता शर्मनाक सवालों के घेरे में आती है। उसके साथ बलात्कार होने के दौरान स्थिति क्या थी, क्या उसकी उचित पैठ थी, क्या आरोपी ने ऐसा कुछ कहा या आगे चलकर आपको परेशान कर देगा। वही निष्कर्ष निकालने के लिए धारा 375 एक अच्छी तरह से बनाई गई फिल्म है, जिसमें आंदोलन अभी भी अपना आधार तलाश रहा है। जैसा कि आप ठीक ही कहता है कि बलात्कार का हर गलत आरोप एक वास्तविक बलात्कार पीड़िता के ताबूत में एक और कील है। जिस पर यह फिल्म सवाल उठाती है।

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